2026-09-19
तजवीद (تجويد) उन उच्चारण नियमों के समूह को कहते हैं जो क़ुरआन को उसी तरह पढ़ने की अनुमति देते हैं जिस तरह वह उतारा गया था। इस शब्द का अर्थ है "सुंदर बनाना" या "बेहतर करना": यह केवल अरबी अक्षरों को पढ़ने की बात नहीं है, बल्कि ध्वनियों की अवधि, अक्षरों के बीच के जोड़ और सही ठहराव का पालन करने की बात है।
तजवीद सीखना हर उस मुसलमान के लिए एक ज़रूरी क़दम है जो क़ुरआन को सही ढंग से पढ़ना चाहता है, चाहे अरबी उसकी मातृभाषा हो या न हो।
हर अरबी अक्षर का मुँह या गले में एक निश्चित निकास बिंदु होता है, जिसे मख़रज (बहुवचन: मखारिज) कहते हैं। इसके पाँच मुख्य क्षेत्र हैं:
इन उच्चारण बिंदुओं में महारत हासिल करने से मिलते-जुलते अक्षरों (जैसे ذ और ز، या ط और ت) में भ्रम से बचा जा सकता है, जो किसी शब्द का अर्थ बदल सकता है।
नून साकिन (نون ساكنة) एक बिना स्वर वाला नून है, और तनवीन (تنوين) अंतिम दोहरे स्वरों (ً ٍ ٌ) को दर्शाता है। ये दोनों स्थितियाँ अगले अक्षर के अनुसार चार नियमों का पालन करती हैं:
वक़्फ़ यह दर्शाता है कि पाठ के अर्थ को बदले बिना, पढ़ते समय कहाँ रुकना संभव या अनुशंसित है। सबसे आम प्रतीक हैं:
इन संकेतों का पालन करने से यह सुनिश्चित होता है कि पाठ का अर्थ अक्षुण्ण बना रहे, खासकर जब किसी आयत में कई परस्पर जुड़े वाक्यांश हों।
आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका है कई तरीकों को मिलाना:
यही है जो Noor Phonetic Quran प्रदान करता है: रंगीन तजवीद के साथ क़ुरआन का पाठ, एक सटीक फ़ोनेटिक ट्रांसक्रिप्शन, और अपनी गति से, आयत-दर-आयत आगे बढ़ने के लिए एक पाठ-सुधार मॉड्यूल।